Birbal and the Paanwala :-एक दिन अकबर को पान खाने की तलब हुई. उन्होंने अपने ख़ास पान वाले को बुलवाया और उससे पान पेश करने को कहा. पान वाले ने बिना देर किये पान बनाया और उसे अकबर को दे दिया.
अकबर ने चुपचाप पान खाया. फिर पानवाले से बोले, “जाओ, आधा किलो चूना लेकर आओ.”
पानवाला तुरंत दुकान की ओर भागा. जिस रास्ते से वह दुकान की ओर जा रहा था, उसी रास्ते से बीरबल महल की ओर आ रहा था. उसने पानवाले को जल्दी-जल्दी कहीं जाते हुए देखा, तो पूछ लिया, “कहो भाई! इतनी जल्दी में कहाँ जा रहे हो?”
पानवाले ने बीरबल को पूरी बात बता दी. पूरी बात सुनने के बाद बीरबल बोला, “ठीक है भाई! तुम जाओ दुकान से चूना ख़रीद लो. लेकिन एक बात ध्यान रखना. बादशाह सलामत के पास जाने के पहले ढेर सारा घी पीकर जाना.”
पानवाले को बीरबल को ये बात समझ नहीं आई.
उसे हैरान देखकर बीरबल बोला, “हैरान मत हो. मैंने जैसा कहा है, वैसा ही करो. मैं भी राजमहल पहुँच रहा हूँ. वहाँ तुम्हें पूरी बात बताऊंगा.”
पानवाला बीरबल के कहे अनुसार ढेर सारा घी पीकर अकबर के पास पहुँचा. वहाँ पहुँचकर उसने आधा किलो चूना उनके सामने पेश किया.
चूना देखकर अकबर ने पानवाले को आदेश दिया, “ये पूरा चूना तुम्हें अभी हमारे सामने खाना होगा.”
अकबर के आदेश का पालन करते हुए पानवाले ने पूरा चूना खा लिया.
चूना खाने के बाद भी जब वह सही-सलामत अकबर के सामने खड़ा रहा, तो अकबर को हैरानगी हुई. उन्होंने पूछा, “इतना सारा चूना खाने के बाद भी तुम सही-सलामत कैसे हो?”
तब पानवाले के बताया कि वह ढेर सारा घी पीकर आया है और ऐसा उसने बीरबल के कहने पर किया है.
अकबर ने बीरबल की ओर नज़र घुमाई, तो बीरबल बोल पड़ा, “जब मुझे पानवाले ने बताया कि पान खाने के बाद आपने बिना कुछ कहे उसे आधा किलो चूना लाने के लिए कहा है. तो मुझे शक़ हुआ कि गलती से उसने पान में ज्यादा चूना डाल दिया होगा और आपके मुँह में छाले हो गए होंगे. सबक सिखाने के लिए आपने उसे इतना चूना लाने के लिए कहा होगा. हुज़ूर! इतना चूना खाने के बाद बेचारा पानवाला जान से जाता. माना इससे गलती हुई, पर इतनी बड़ी सजा का हकदार ये नहीं था. इसलिए मैंने चूने का असर कम करने के लिए इससे घी पीकर आपके सामने हाज़िर होने को कहा था.”
अकबर बीरबल की अक्लमंदी पर खुश हुए और पानवाले को अगली बार ऐसी गलती ना करने के लिए आगाह कर जाने दिया.
Pingback: A pot full of wisdom|बुद्धि से भरा घड़ा - angel73.in