one man three:-बादशाह अकबर अक्सर बीरबल के सामने अजीबोगरीब सवालों की बौछार करते रहते थे। एक दिन उन्होंने बीरबल से पूछा, “बीरबल! क्या तुम एक ही आदमी में हमें तीन तरह की खूबियाँ दिखा सकते हो?”
“जी जहांपनाह!” बीरबल ने जवाब दिया।
“तो ठीक है! शाम तक उस आदमी को हमारे सामने पेश करो, जिसमें तुम हमें तीन तरह की खूबियाँ दिखा सको।” अकबर ने हुक्म दिया।
शाम होते ही अकबर बीरबल का इंतज़ार करने लगे। कुछ ही देर में बीरबल हाजिर हुआ। उसके साथ दुबला-पतला मरियल-सा आदमी था। उस आदमी ने अकबर को सलाम किया।
अकबर उस आदमी को ध्यान से देखने लगे, तभी बीरबल ने एक सेवक से कहकर ज़ाम के तीन गिलास मंगवाये। ज़ाम का एक गिलास उस आदमी की तरफ बढ़ाकर बीरबल ने कहा, “पियो!”
आदमी ने अकबर को देखा, फिर डरते-डरते ज़ाम पी गया। ज़ाम पीने के बाद वो और ज्यादा डर गया और हाथ जोड़कर बोला, “जहांपनाह! मुझे माफ़ कर दीजिये। मैं एक गरीब आदमी हूँ। जो हुक्म देंगे, वही करूंगा।”
बीरबल ने अकबर से कहा, “जहांपनाह! इसकी बोली सुनी आपने। ये तोते की बोली है।”
उसके बाद बीरबल ने ज़ाम का दूसरा गिलास उस आदमी को पीने के लिए दिया। आदमी ने एक घूंट में ज़ाम का गिलास खाली कर दिया। अब उस पर नशा चढ़ चुका था और वह बहकने लगा था।
वह सीना ठोंकते हुए अकबर से बोला, “तू खुद को समझता क्या है? तू होगा कहीं का बादशाह, पर मैं भी अपने घर का बादशाह हूँ। मेरे सामने ज्यादा चूं-चपड़ मत कर।”
अकबर उसका बदला हुआ रंग देखकर हैरान था। बीरबल बोला, “जहांपनाह! इस बोली को पहचाना आपने! ये शेर की बोली है।”
उसके बाद बीरबल ने तीसरे और आखिरी गिलास में भरा ज़ाम उस आदमी को दिया, जिसे उसने लपककर ले लिया और पीकर लड़खड़ाने लगा। वह पीकर इतना टुन्न हो चुका था कि अनाप-शनाप बड़बड़ाये जा रहा था।
बीरबल ने मुस्कुराते हुए अकबर को देखा और बोला, “जहांपनाह! ये गधे की बोली है।”
अकबर भी उसकी हालत देख हँसते हुए बोले, “वाह बीरबल! मान गए तुम्हें।”